मैं हूँ क्यूंकि हो तुम!

दूर होकर भी पास हो तुम,
हर कही कहानी में हो तुम,
हर लिखी कविता में हो तुम,
हर संगीत के सरगम में हो तुम,
हर दास्तान की सुर्खियों में हो तुम!

खामोश रहकर भी मेरी आवाज़ हो तुम,
हर छुपी मुस्कुराहट में हो तुम,
हर शरारत की नादानी में हो तुम,
हर हरकत की पहर में हो तुम,
हर झूमते कदम की हलचल में हो तुम!

अतीत बनकर भी मेरा वर्त्तमान हो तुम,
वर्त्तमान रहकर भी मेरा भविष्य हो तुम,
मेरे हर साँस में हो तुम,
मेरी हर तस्वीर में हो तुम,
मेरे हर पल में हो तुम!

मेरे हर लम्हों का वजूद हो तुम,
मेरे अस्तित्व की सच्चाई हो तुम,
मैं हूँ क्यूंकि हो तुम!

Comments

maneesh said…
Mrs. Arora must be doing a jig in joy...!
Madhurima said…
Unko kaafi tang kiya tha school mein apni kavitaao se. Phir jab college pahuchi...toh wapas jaake unhe bataaya ki state level natak pratiyogitao ke liye likh rahi hoon:) definitely owe this skill to her!! She was my fav teacher:)
maneesh said…
Hahaha!! Main toh 10B mein kabhi 'Naalaayak Ladke' ke aage jaa nahin sakaa...

Aur yeh sab unhi ke exam paper mein ekdum Dhang se nibandh vageraa likhne ke bawjood...

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