Friday, July 3, 2009

दो बातें...

गहरा बादल
मचलती हवा
अनोखा एहसास
चाह तुम्हारी।

बदलता आलम
टिमटिमाती तारे
सूनी राहें
प्यासा इंतज़ार।

बिखरे जुल्फे
झुकी पलके
कमसिन मुस्कराहट
लचकता बदन।

इन ख्वाहिशों की डोर हाथों में तुम्हारे,
इन पलों की सच्चाई बाँहों में तुम्हारे।

बस कहनी थी यह दो बातें...

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